Friday, 3 February 2012

पोंटि की माया !!!!!!!!!!!!!!!!!

१ दिन : बक्से में हो सकते हैं २०० करोड़
२ दिन : पुरे दिन समाचार में नहीं
३ दिन बक्से खाली थे (पोंटि की माया बिकी मीडिया नहीं मिली छाया)
याद आई संजय दत्त, इरफ़ान खान की फिल्म नौकआउट!!!!
मीडिया का बिकना हो चुकी है आम बात इनके कहने से कैसे जागे लोग जिससे पैसा मिलता है उसी को मिलता है
कवरेज वही छाया रहता है टीवी पर ये पैसे ले के दिखाते है ओपिनियन पोल !

""बिक रही मीडिया आये उन्हें अब शर्म नहीं !
इनकी उछाली ख़बरों में कुछ बासी कुछ गरम नहीं !
जाग चुकी है जनता सारी इसमें अब कोई भरम नहीं !
छोड़ किनारे बढे हम सारे तेवर अब नरम नहीं !
देशभक्ति से बढ़ कर अभिषेक दुनिया में कोई धरम नहीं !""

Saturday, 28 January 2012

क्यों हैं !!!!
 आज के दौर में ये मंज़र क्यों हैं ज़ख़्म हर सर पे, हर हाथ में पत्थर क्यों हैं १ 
जब हकीकत है की हर ज़र्रे में खुदा रहता है ,फिर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यों हैं १ 
अपना अंजाम तो मालूम है सबको फिर अपनी नजरो में हर इंसान सिकंदर क्यों है १ 
ज़िन्दगी जीने के अब काबिल ही नहीं शायद वर्ना हर आँख में अश्को का समंदर क्यों है १